वात के 80 प्रकार के रोग
वात के 80 प्रकार के रोग 1. नखभेद : नाखूनों का टूटना। 2. विपादिका : हाथ-पैर फटना। 3. पादशूल : पैरों में दर्द होना। 4.पादभ्रंश : पैरों पर नियंत्रण न हो पाना। 5. पादसुप्तता : पैरों का सुन्न होना। 6. वात खुड्डता : पैर व जांघ की संधियों में वात जन्य वेदना का होना, पिंडली वाली दो हड्डियां, घुटनों के नीचे वाली दो हड्डियों (जंघास्थि और अनुजंघास्थि) टखने से एड़ी तक के हिस्से के जोड़ों में दर्द और लंगड़ापन। 7. गुल्फ ग्रह : (गुल्फ प्रदेश का जकड़ जाना)- एड़ी के आसपास सात हड्डियों के समूह को गुल्फ प्रदेश कहते हैं। 8. पिडिकोद्वेष्टन : पैर की पिंडलियों में ऐंठन जैसा दर्द। 9. ग्रध्रसि : सायटिका का दर्द। इसमें कमर से कूल्हे की हड्डी में होकर पैर तक एक सायटिका नाड़ी (ग्रध्रसि नाड़ी) में सुई की चुभन जैसा दर्द होता है। 10 . जानू भेद : घुटनों के ऊपर वाली हड्डी। ये दोनों पैरों पर 1-1 होती है। इसमें टूटने जैसा दर्द। 11. जानुविश्लेष : जानू की संधियों का शिथिल हो जाना। 12. उरूस्तंभ : जानू हड्डी का जकडऩा। यदि दर्दनाशक तेल मलने से दर्द बढ़े तो उरूस्तंभ वात रोग होता है वर्ना नहीं। 13. ऊरूसाद : ऊरूप्रदेश में...