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एचएमपीवी वायरस (HMPV) के बारे में जानकारी

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 🙏 एचएमपीवी वायरस (HMPV) के बारे में जानकारी:   पूरा नाम: ह्यूमन मेटापनेउमोवायरस (Human Metapneumovirus) पहचान: HMPV एक श्वसन संबंधी वायरस है जो फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। पहली बार: इस वायरस की खोज 2001 में हुई थी। लक्षण: बुखार खांसी सांस लेने में कठिनाई नाक बहना गले में खराश थकान प्रभावित समूह: छोटे बच्चे बुजुर्ग कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग संक्रमण का तरीका: HMPV वायरस खांसने, छींकने या संक्रमित सतह को छूने से फैलता है। उपचार: अभी तक कोई विशेष वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। लक्षणों के अनुसार इलाज किया जाता है, जैसे बुखार कम करने वाली दवाएं और तरल पदार्थ का सेवन। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती कर ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जा सकता है। रोकथाम: हाथ धोने की आदत रखें। खांसते और छींकते समय मुंह ढकें। भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचें। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों का विशेष ध्यान रखें। यह वायरस कोविड-19 की तरह गंभीर नहीं है, लेकिन यह श्वसन समस्याओं का कारण बन सकता है। समय पर लक्षण पहचानकर डॉक्टर से संपर्क करना महत्वपूर्ण है। https://www.facebook.com/share/17wiPUFPrc/

100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए

 *100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए* 1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है। 2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है । 3. *हाई वी पी में* -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे । 4. *लो बी पी* - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें । 5. *कूबड़ निकलना*- फास्फोरस की कमी । 6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं  7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी । 8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन , कैल्शियम की कमी । 9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* । 10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* । 11. *जम्भाई*- शरीर में आक्सीजन की कमी । 12. *जुकाम* - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें । 13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें । 14.  *किडनी* - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये । 15. *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आय...

अलसी (तीसी )के गुण और प्रयोग

 *जाने अलसी (तीसी )के गुण और प्रयोग कर इसका लाभ उठाये* ■ अलसी की खेती मुख्यत: बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में होती है। अलसी का पौधा 2 से 4 फुट ऊंचा होता है। इसके पत्ते रेखाकार एक से तीन इंच लंबे होते हैं। फूल मंजरियों में हलके नीले रंग के होते हैं। फल कलश के समान आकार के होते हैं, जिसमें 10 बीज होते हैं। बीज ललाई लिए चपटे, अंडाकार, चमकदार होते हैं। बीजों से अलसी का तेल बनता है। अलसी की जड़ सफेद रंग की, पेंसिल जितनी मोटी और 4 से 10 इंच लंबी होती है। *देश की विभिन्न भाषाओं में नाम:* ➖संस्कृत         अतसी, नील पुष्पी, क्षुमा,                        उमा, पिच्छला, अतसी। ➖हिंदी            अलसी, तीसी। ➖मराठी          जवसु। ➖गुजराती       अलशी, अलसी। ➖बंगाली          मर्शिना। ➖तेलगू           बित्तु, अलसि, अतसी। ➖अंग्रेजी          फ्लैक्स सीड...

वात के 80 प्रकार के रोग

 वात के 80 प्रकार के रोग 1. नखभेद : नाखूनों का टूटना। 2. विपादिका : हाथ-पैर फटना। 3. पादशूल : पैरों में दर्द होना। 4.पादभ्रंश : पैरों पर नियंत्रण न हो पाना। 5. पादसुप्तता : पैरों का सुन्न होना। 6. वात खुड्डता : पैर व जांघ की संधियों में वात जन्य वेदना का होना, पिंडली वाली दो हड्डियां, घुटनों के नीचे वाली दो हड्डियों (जंघास्थि और अनुजंघास्थि) टखने से एड़ी तक के हिस्से के जोड़ों में दर्द और लंगड़ापन। 7. गुल्फ ग्रह : (गुल्फ प्रदेश का जकड़ जाना)- एड़ी के आसपास सात हड्डियों के समूह को गुल्फ प्रदेश कहते हैं। 8. पिडिकोद्वेष्टन : पैर की पिंडलियों में ऐंठन जैसा दर्द। 9. ग्रध्रसि : सायटिका का दर्द। इसमें कमर से कूल्हे की हड्डी में होकर पैर तक एक सायटिका नाड़ी (ग्रध्रसि नाड़ी) में सुई की चुभन जैसा दर्द होता है। 10 . जानू भेद : घुटनों के ऊपर वाली हड्डी। ये दोनों पैरों पर 1-1 होती है। इसमें टूटने जैसा दर्द। 11. जानुविश्लेष : जानू की संधियों का शिथिल हो जाना। 12. उरूस्तंभ : जानू हड्डी का जकडऩा। यदि दर्दनाशक तेल मलने से दर्द बढ़े तो उरूस्तंभ वात रोग होता है वर्ना नहीं। 13. ऊरूसाद : ऊरूप्रदेश में...

फलों का राजा आम

 *फलों का राजा आम*          *ग्रन्थों के अनुसार आम का फल खट्टा, स्वादिष्ट, वात, पित्त को पैदा करने वाला होता है, किन्तु पका हुआ आम मीठा, धातु को बढ़ाने वाला (वीर्यवर्धक), शक्तिवर्धक, वातनाशक, ठंडा, दिल को ताकत देने वाला, पित्त को बढ़ाने वाला और त्वचा को सुन्दर बनाने वाला होता है।*          *यूनानियों के अनुसार कच्चे आम का स्वाद खट्टा, पित्तनाशक, भूख बढ़ाने वाला, पाचन शक्ति बढ़ाने वाला और कब्ज दूर करने वाला होता है।*          *वैज्ञानिकों द्वारा आम पर विश्लेषण करने पर यह पता चला है कि इसमें पानी की मा़त्रा 86 प्रतिशत, वसा 0.4 प्रतिशत, खनिज 0.4 प्रतिशत, प्रोटीन 0.6 प्रतिशत, कार्बोहाड्रेट 11.8 प्रतिशत, रेशा 1.1 प्रतिशत, ग्लूकोज आदि पाया जाता है।* *दुष्प्रभाव :- अधिक मात्रा में कच्चे आम का सेवन करने पर वीर्य में पतलापन, मसूढ़ों में कष्ट, तेज बुखार, आंखों का रोग, गले में जलन, पेट में गैस और नाक से खून आना इत्यादि विकार उत्पन्न हो जाते हैं। खाली पेट आम खाना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। भूखे पेट आम नहीं खाना चाहिए। ...

देशी गाय के घी के 66 चमत्कारिक गुण

 देशी गाय के घी के 66 चमत्कारिक गुण           – स्वास्थ्य वैज्ञानिक उत्तम माहेश्वरी देशी गाय का घी, साधारण घी नहीं, पूरे परिवार के लिए अमृत है। जानिए इसके 1008 गुणों में से 66 गुण। जिन्हें पढ़कर आपके समझ में आयेगा कि इसे बदनाम करना मेडिकल गिरोह का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है। औषधीय गुण 1. पूरे परिवार को 80% शारीरिक-मानसिक रोगों से बचाये 2. पूरे परिवार के मेडिकल खर्च को 90% कम करे 3. तेजी से मोटापा घटाये 4. बिना ऑपरेशन हार्ट ब्लॉकेज खत्म करने में सहायक 5. LDL, VLDL (खराब कॉलेस्ट्रोल), ट्राइग्लिसराइड्स कम करे 6. आपात्काल (emergency) जैसे; ब्रेन हेमरेज .... में प्राणरक्षक 7. नर्वस सिस्टम (लकवा, पार्किंसंस...) के रोगों में अत्यंत प्रभावी 8. रोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ाये 9. कोरोना रोकने में रामबाण 10. दर्द मिटाये 11. कब्ज मिटाये 12. एसिडिटी मिटाये 13. अल्सर को जड़ से मिटाये 14. बवासीर (Piles), फिशर में  लाभदायक 15. संधिवात (जोड़ों के दर्द) में अमृत 16. सूखी खाँसी में अमृत 17. चर्म रोगों में गुणकारी 18. एक्सीडेंट, ऑपरेशन के घावों को तुरंत भरे 19. घुटनों को बदलवाने से बच...